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26 January Speech in Hindi: गणतंत्र दिवस पर दें ऐसा जोश भरा भाषण, हर तरफ गूंजेगा ‘जय हिंद’

On: January 22, 2026 2:58 PM
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26 January Speech in Hindi: गणतंत्र दिवस पर दें ऐसा जोश भरा भाषण, हर तरफ गूंजेगा 'जय हिंद'

26 January Speech in Hindi- क्या आप भी इस 26 जनवरी पर स्टेज पर जाकर ऐसा भाषण देना चाहते हैं जो सबके रोंगटे खड़े कर दे? चाहे आप स्कूल में हों, कॉलेज में, या ऑफिस में—गणतंत्र दिवस (Republic Day) पर माइक थामना एक गर्व की बात होती है। लेकिन अक्सर सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि “शुरुआत कैसे करें?” या “ऐसा क्या बोलें जो बोरिंग न हो?” घबराइए मत! Timely Bharat की यह स्पेशल रिपोर्ट आपकी मदद करेगी एक ऐसा भाषण तैयार करने में, जो तालियों की गड़गड़ाहट के साथ खत्म होगा।

इस आर्टिकल में हम आपके लिए लाए हैं Students, Teachers और Office Professionals के लिए 3 अलग-अलग तरह के दमदार स्पीच ड्राफ्ट्स और कुछ प्रो-टिप्स।


1. स्पीच की धमाकेदार शुरुआत कैसे करें? (The Perfect Hook- 26 January Speech in Hindi)

26 January Speech in Hindi: गणतंत्र दिवस पर दें ऐसा जोश भरा भाषण, हर तरफ गूंजेगा 'जय हिंद'
26 January Speech in Hindi

किसी भी भाषण की जान उसकी शुरुआत होती है। अगर पहले 30 सेकंड में आपने दर्शकों का ध्यान नहीं खींचा, तो बाद में मुश्किल हो सकती है। “आदरणीय प्रधानाचार्य जी…” से शुरू करने से पहले, एक शेर या किसी क्रांतिकारी पंक्ति का इस्तेमाल करें।

शुरुआत के लिए कुछ बेहतरीन पंक्तियाँ:

  • “ना पूछो जमाने से कि क्या हमारी कहानी है, हमारी पहचान तो बस इतनी है कि हम हिंदुस्तानी हैं।”
  • “गूंज रहा है दुनिया में भारत का नगाड़ा, चमक रहा आसमान में देश का सितारा।”
  • “आजादी का जोश कभी कम न होने देंगे, जब भी जरूरत पड़ेगी देश के लिए जान लुटा देंगे।”

2. भाषण 1: स्कूल के छोटे बच्चों के लिए (Short & Simple Speech for Kids)

यह भाषण कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों के लिए है। यह छोटा, सरल और याद करने में आसान है।

Draft:

“आदरणीय प्रधानाचार्य जी, मेरे प्यारे शिक्षकों और मेरे दोस्तों, आप सभी को सुप्रभात!

आज हम सब यहाँ अपने देश का 77वां गणतंत्र दिवस (77th Republic Day) मनाने के लिए इकट्ठा हुए हैं। आप सभी को गणतंत्र दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

दोस्तों, 15 अगस्त 1947 को हमें आजादी मिली थी, लेकिन हमारे देश का अपना कानून यानी ‘संविधान’ 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ था। इसीलिए हम हर साल इस दिन को इतने धूमधाम से मनाते हैं।

आज का दिन हमें याद दिलाता है उन वीर सपूतों की, जिन्होंने देश के लिए अपनी जान दी। भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस और महात्मा गांधी जैसे महापुरुषों ने हमें आजादी का तोहफा दिया। अब हमारी जिम्मेदारी है कि हम अच्छे बच्चे बनें, खूब पढ़ें और अपने देश का नाम रोशन करें।

अंत में मैं बस इतना कहना चाहूंगा/चाहूंगी: देश की जो रक्षा करेगा, वही सच्चा इंसान है, इस देश की मिट्टी में ही, हम सबकी जान है।

जय हिन्द! जय भारत!


3. भाषण 2: कॉलेज छात्रों और युवाओं के लिए (Energetic Speech for College/Youth)

युवाओं के भाषण में जोश, फैक्ट्स और भविष्य की बात होनी चाहिए। इस बार की 2026 की थीम ‘वंदे मातरम के 150 साल’ को भी इसमें जोड़ा जा सकता है।

Draft:

गणतंत्र दिवस भाषण: “आईना और उम्मीद”

(समय: लगभग 20-25 मिनट)

संबोधन और शुरुआत

मंच पर आसीन आदरणीय अतिथिगण, मेरे गुरुजन, और मेरे सामने बैठे मेरे देश के भविष्य—मेरे दोस्तों।

आज 26 जनवरी है। हम सब जानते हैं कि आज के दिन क्या हुआ था। 1950 में हमारा संविधान लागू हुआ था। तालियां बजेंगी, लड्डू बंटेंगे, और हम सब अपने-अपने घर जाकर फिर वही रोज़मर्रा की ज़िंदगी में मशगूल हो जाएंगे। पर रुकिए… क्या आज हम यहाँ सिर्फ़ एक रस्म निभाने आए हैं? क्या हम यहाँ सिर्फ़ इसलिए हैं क्योंकि कैलेंडर पर लाल रंग की छुट्टी है?

नहीं।

आज मैं यहाँ आपको कोई रटी-रटाई कहानी सुनाने नहीं आया हूँ कि “भारत सोने की चिड़िया था”। मैं आज आपसे वो बात करने आया हूँ जो हम अक्सर ड्राइंग रूम में, चाय की टपरी पर या दोस्तों के बीच दबी जुबान में करते हैं। आज मैं उस “भारत” की बात करूँगा जो सड़कों पर है, जो संघर्ष कर रहा है, और जो अपनी पहचान ढूंढ रहा है।

दोस्तों, हम “गणतंत्र” हैं। ‘गण’ का मतलब है लोग, और ‘तंत्र’ का मतलब है व्यवस्था। यानी लोगों की व्यवस्था। लेकिन आज हमें अपने दिल पर हाथ रखकर पूछना होगा—क्या यह व्यवस्था वाकई हम ‘लोगों’ के लिए काम कर रही है? या हम सिर्फ़ इस तंत्र के पुर्जे बनकर रह गए हैं?

भाग 1: गर्व और विरासत (The Legacy)

इससे पहले कि मैं आज की कड़वी सच्चाइयों पर आऊं, हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हम खड़े कहाँ हैं। हम उस ज़मीन पर खड़े हैं जिसे भगत सिंह, आज़ाद, और बोस जैसे दीवानों ने अपने खून से सींचा है। हम उस देश के वासी हैं जिसने दुनिया को शून्य (Zero) दिया, जिसने दुनिया को बताया कि अहिंसा में कितनी ताकत होती है।

हमें गर्व है कि आज हमारा ‘चंद्रयान’ चाँद के उस हिस्से पर जा पहुँचा जहाँ दुनिया का कोई देश नहीं पहुँच पाया। हमें गर्व है कि आज हमारी डिजिटल पेमेंट (UPI) को देखकर अमेरिका और यूरोप भी हैरान हैं कि भारत जैसा देश तकनीक में इतना आगे कैसे निकल गया। हमें गर्व है अपनी सेना पर, जो सियाचिन की हाड़ कंपा देने वाली ठंड में भी चट्टान की तरह खड़ी है ताकि आप और मैं यहाँ चैन से सांस ले सकें।

लेकिन… और यह ‘लेकिन’ बहुत बड़ा है दोस्तों… क्या सिर्फ़ पुरानी उपलब्धियों या कुछ नई मिसाइलों के दम पर हम महान बन जाएंगे?

भाग 2: वर्तमान का आईना (The Mirror of Reality)

चलिए, थोड़ा आईना देखते हैं। और आईना कभी झूठ नहीं बोलता।

आज देश कहाँ जा रहा है? अख़बार का पन्ना पलटिए। आपको विकास की खबरें मिलेंगी, बुलेट ट्रेन की बातें मिलेंगी, लेकिन उसी पन्ने के किसी कोने में एक खबर यह भी होगी कि एक किसान ने कर्ज़ के बोझ तले दबकर आत्महत्या कर ली। क्या यही वो गणतंत्र है जिसका सपना अंबेडकर जी ने देखा था?

हम 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने की बात करते हैं, और यह सपना बहुत खूबसूरत है। लेकिन इस सपने की नींव क्या है? आज हमारे देश का युवा—जो दुनिया में सबसे ज़्यादा तादाद में है—वो क्या कर रहा है? कड़वा सच यह है दोस्तों, कि हमारे पास डिग्रियां तो हैं, पर हुनर नहीं। हमारे पास इंजीनियर तो लाखों हैं, पर इनोवेशन कहाँ है? आज का युवा सरकारी नौकरी की एक सीट के लिए 10-10 साल अपनी जवानी के बर्बाद कर रहा है। क्यों? क्योंकि उसे सिस्टम पर भरोसा नहीं है कि वो अपनी मेहनत से, अपने स्टार्टअप से कुछ खड़ा कर पाएगा या नहीं। उसे डर है।

हम “विश्वगुरु” बनने की बात करते हैं, लेकिन हमारे अपने ही देश में, अपनी ही बेटियों के लिए सड़कें सुरक्षित क्यों नहीं हैं? 26 जनवरी की परेड में हम नारी शक्ति का प्रदर्शन करते हैं, फाइटर जेट उड़ाते हुए महिलाओं को दिखाते हैं, हमें बहुत गर्व होता है। लेकिन सूरज ढलते ही उसी देश की सड़कों पर एक अकेली लड़की डरती क्यों है? जब तक इस देश की हर एक बेटी, चाहे वो गांव की हो या शहर की, बेखौफ होकर रात को घर नहीं लौट सकती, तब तक मेरा मानना है कि हमारा गणतंत्र अधूरा है।

भाग 3: देश किस दिशा में जा रहा है? (The Direction)

अब बात करते हैं उस सवाल की जो आपने मुझसे पूछा—हमारा देश कहाँ जा रहा है?

सच कहूँ तो, हम एक दोराहे पर खड़े हैं। एक तरफ ‘न्यू इंडिया’ है—चमकता हुआ, स्टार्ट-अप्स वाला, स्मार्ट सिटी वाला इंडिया। जहाँ हम मंगल पर पानी खोज रहे हैं। और दूसरी तरफ एक ‘बंटा हुआ इंडिया’ है।

आज हमें तोड़ा जा रहा है। कभी धर्म के नाम पर, कभी जाति के नाम पर, कभी भाषा के नाम पर। सोशल मीडिया खोलकर देखिये, वहाँ सिर्फ ज़हर है। हम एक-दूसरे को नीचा दिखाने में इतने व्यस्त हो गए हैं कि हमें दिखता ही नहीं कि असली दुश्मन कौन है।

हमारा असली दुश्मन वो पड़ोसी मुल्क नहीं है, हमारा असली दुश्मन है—गरीबी, अशिक्षा, और भ्रष्टाचार। हम लड़ रहे हैं कि मेरा भगवान बड़ा या तेरा? अरे, भगवान तो तब खुश होगा जब उसकी बनाई हुई दुनिया में इंसान, इंसान से प्यार करेगा। हम इतिहास के मुर्दे उखाड़ने में लगे हैं, जबकि हमारा भविष्य हमारे हाथ से फिसलता जा रहा है।

आज देश में एक अजीब सा माहौल है। सवाल पूछना गुनाह हो गया है। अगर आप सिस्टम से सवाल पूछ लो, तो आपको ‘देशद्रोही’ या ‘एंटी-नेशनल’ का टैग दे दिया जाता है। याद रखिये दोस्तों, लोकतंत्र में सरकार की आलोचना करना देशद्रोह नहीं, बल्कि सबसे बड़ी देशभक्ति है। क्योंकि एक सच्चा देशभक्त ही चाहता है कि उसका देश सुधरे, उसकी कमियां दूर हों। जो चुप है, जो सब कुछ सह रहा है, वो देशभक्त नहीं, वो सिर्फ़ एक भीड़ का हिस्सा है।

भाग 4: हमारी ज़िम्मेदारी (The Responsibility)

तो अब सवाल उठता है—गलती किसकी है? नेताओं की? सरकार की? पुलिस की? नहीं। सबसे बड़ी गलती हमारी है। हम, भारत के लोग।

हम हर 5 साल बाद वोट देते हैं और सोचते हैं कि हमारी ज़िम्मेदारी ख़त्म। हम अपनी गलियों का कचरा साफ़ नहीं करते, पर उम्मीद करते हैं कि देश साफ़ हो जाए। हम ट्रैफिक सिग्नल तोड़ते हैं, रिश्वत देते हैं, टैक्स चोरी करते हैं, और फिर चाय की चुस्की लेते हुए कहते हैं—”इस देश का कुछ नहीं हो सकता।”

दोस्तों, अगर देश का कुछ नहीं हो सकता, तो वो आपकी वजह से नहीं हो सकता। “यथा राजा तथा प्रजा” नहीं, बल्कि लोकतंत्र में “यथा प्रजा तथा राजा” होता है। जैसे हम होंगे, वैसे ही हमारे नेता होंगे। अगर हम जाति देखकर वोट देंगे, तो नेता विकास क्यों करेगा? अगर हम दारू की बोतल या 500 रुपये के नोट पर अपना ज़मीर बेच देंगे, तो हम उनसे ईमानदारी की उम्मीद कैसे कर सकते हैं?

भाग 5: आग और आह्वान (The Fire Within)

मेरे साथियों, मैं आज आपको जगाने आया हूँ। 26 जनवरी सिर्फ़ झंडा फहराने का दिन नहीं है। यह दिन है ‘संविधान’ को जीने का। वो संविधान जो आपको हक़ देता है बराबरी का, बोलने का, जीने का।

हमें वो पीढ़ी बनना होगा जो बदलाव का इंतज़ार नहीं करती, बल्कि बदलाव लेकर आती है। अगर सड़क पर गड्ढा है, तो सरकार को कोसने के बजाय उसे भरने की पहल करो। अगर किसी के साथ अन्याय हो रहा है, तो वीडियो बनाने के बजाय उसकी मदद करो। अगर कोई व्हाट्सएप पर नफरत फैला रहा है, तो उसे फॉरवर्ड करने के बजाय वहीं डिलीट करो और उसे टोको।

हमें एक ऐसा भारत बनाना है जहाँ एक गरीब का बच्चा भी वही सपना देख सके जो एक अमीर का बच्चा देखता है। जहाँ न्याय के लिए अदालतों के चक्कर न काटने पड़ें। जहाँ अस्पताल में बेड न मिलने से किसी की जान न जाए। जहाँ किसान को अपनी फसल सड़कों पर न फेंकनी पड़े।

यह “आग” जो मुझे चाहिए, वो बसों को जलाने वाली आग नहीं है। वो सरकारी संपत्ति तोड़ने वाली आग नहीं है। मुझे वो आग चाहिए जो आपके सीने में जले। वो आग जो आपको सोने न दे जब तक आप अपने लक्ष्य को न पा लें। वो आग जो अन्याय देखकर भड़क उठे। वो आग जो देश को राख करने के लिए नहीं, बल्कि देश को सोने की तरह तपाकर कुंदन बनाने के लिए हो।

निष्कर्ष (Conclusion)

मैं अपनी वाणी को विराम देने से पहले बस इतना कहूँगा:

यह देश किसी एक पार्टी का नहीं, किसी एक परिवार का नहीं, किसी एक धर्म का नहीं है। यह देश है उस मजदूर का जो ईंटें जोड़ रहा है। यह देश है उस सैनिक का जो सीमा पर जाग रहा है। यह देश है उस वैज्ञानिक का जो लैब में खप रहा है। और सबसे बढ़कर, यह देश है आपका

तो आज, इस तिरंगे के नीचे खड़े होकर, चलिए एक वादा करते हैं। कि हम भारत को सिर्फ़ नक्शों पर महान नहीं रहने देंगे। हम इसे हकीकत में महान बनाएंगे। हम सवाल पूछेंगे, हम लड़ेंगे, हम गिरेंगे, पर हम हार नहीं मानेंगे।

क्योंकि हम उस देश के वासी हैं जहाँ खून में उबाल होना लाज़िमी है।

उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक यह देश दुनिया के शिखर पर न हो!

जय हिन्द! जय भारत!

4. भाषण 3: शिक्षकों और ऑफिस के लिए (Professional Speech for Teachers/Offices)

यह भाषण थोड़ा गंभीर, विचारशील और प्रेरणादायक होना चाहिए।

Draft:

“परम आदरणीय मुख्य अतिथि, साथी अध्यापकों और प्यारे बच्चों,

आज का दिन आत्म-चिंतन (Self-reflection) का दिन है। जब 26 जनवरी 1950 को हमारा संविधान लागू हुआ, तो पूरी दुनिया को शक था कि क्या इतना विविधता भरा देश एक साथ चल पाएगा? लेकिन आज, 2026 में, भारत न केवल एकजुट है, बल्कि विश्व गुरु बनने की राह पर अग्रसर है।

एक शिक्षक (या पेशेवर) के रूप में, हमारा योगदान क्या है? बॉर्डर पर खड़ा जवान देश की रक्षा कर रहा है, लेकिन एक शिक्षक कक्षा के अंदर देश का ‘भविष्य’ गढ़ रहा होता है। संविधान हमें अधिकार (Rights) देता है, लेकिन साथ ही कर्तव्य (Duties) भी याद दिलाता है। अक्सर हम अधिकारों की बात तो करते हैं, लेकिन कर्तव्यों को भूल जाते हैं।

आज हमें अपने संविधान के मूल्यों—न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे—को सिर्फ किताबों में नहीं, बल्कि अपने व्यवहार में उतारना होगा। अगर हम अपने कार्यस्थल पर ईमानदारी और निष्ठा से काम करें, तो यही राष्ट्र निर्माण में हमारा सबसे बड़ा योगदान होगा।

आइए, आज हम अपने उन स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करें और संकल्प लें कि हम भारत को एक समर्थ और सशक्त राष्ट्र बनाएंगे।

धन्यवाद। जय हिन्द।

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5. स्पीच को यादगार बनाने के लिए 5 प्रो-टिप्स (Pro-Tips)

एक अच्छा भाषण सिर्फ कंटेंट से नहीं, बल्कि बोलने के तरीके (Delivery) से बनता है। इन बातों का ध्यान रखें:

  1. बॉडी लैंग्वेज (Body Language): स्टेज पर जाकर सीधे खड़े हों। झुकें नहीं। अपनी आँखों से दर्शकों (Eye Contact) से जुड़ें, सिर्फ कागज में देखकर न पढ़ें।
  2. आवाज़ का उतार-चढ़ाव (Voice Modulation): पूरा भाषण एक ही टोन में न बोलें। जब ‘वीरता’ की बात हो, तो आवाज़ में जोश लाएं। जब ‘बलिदान’ की बात हो, तो आवाज़ में गंभीरता और ठहराव लाएं।
  3. रट्टा न मारें (Don’t Memorize Blindly): मुख्य बिंदुओं (Bullet points) को याद रखें। अगर आप शब्द-दर-शब्द रटने की कोशिश करेंगे और एक शब्द भूल गए, तो आप अटक जाएंगे।
  4. फैक्ट्स का तड़का (Use Facts): भाषण में रोचक तथ्य जोड़ें। जैसे:
    • क्या आप जानते हैं कि भारतीय संविधान दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान है?
    • इसे लिखने में 2 साल, 11 महीने और 18 दिन का समय लगा था।
  5. समय का ध्यान (Timing): अपना भाषण 3 से 5 मिनट के बीच रखें। बहुत लंबा भाषण दर्शकों को बोर कर सकता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

26 जनवरी सिर्फ एक छुट्टी का दिन नहीं है। यह दिन है यह महसूस करने का कि हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र (Largest Democracy) का हिस्सा हैं। चाहे आप स्कूल के छात्र हों या किसी कंपनी के मैनेजर, आपकी आवाज़ में देश के प्रति सम्मान और भविष्य के प्रति उम्मीद झलकनी चाहिए।

Timely Bharat की तरफ से आप सभी पाठकों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ! जाइए, मंच पर छा जाइए!

जय हिन्द, जय भारत।

Timely Bharat Desk

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