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Lamborghini Hit and Run: 90 घंटे की ‘पकड़म-पकड़ाई’ खत्म, पुलिस के हत्थे चढ़ा आरोपी शिवम मिश्रा और फिर बेल: कानपुर हिट-एंड-रन का पूरा सच

On: February 12, 2026 7:41 PM
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Lamborghini Hit and Run: 90 घंटे की 'पकड़म-पकड़ाई' खत्म, पुलिस के हत्थे चढ़ा आरोपी शिवम मिश्रा! 6 लोगों को मारी थी टक्कर

Lamborghini Hit and Run: क्या 10 करोड़ की गाड़ी सड़क पर नियमों से ऊपर हो जाती है? कानपुर के हाई-प्रोफाइल Lamborghini हिट-एंड-रन केस ने एक बार फिर ‘VIP कल्चर’ और सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोचिए, एक रईसजादा अपनी सुपरकार से लोगों को कुचलता है, 90 घंटे तक पुलिस उसे तलाशती है, और जब गिरफ्तारी होती है, तो महज कुछ ही घंटों में उसे जमानत भी मिल जाती है। यह कोई फिल्मी सीन नहीं, बल्कि कानपुर की हकीकत है।

VIP रोड पर रफ्तार का कहर– Lamborghini Hit and Run:

Lamborghini Hit and Run: 90 घंटे की 'पकड़म-पकड़ाई' खत्म, पुलिस के हत्थे चढ़ा आरोपी शिवम मिश्रा! 6 लोगों को मारी थी टक्कर
Lamborghini Hit and Run: 90 घंटे की ‘पकड़म-पकड़ाई’ खत्म, पुलिस के हत्थे चढ़ा आरोपी शिवम मिश्रा!

यह पूरी घटना 8 फरवरी 2026 की दोपहर की है। कानपुर के ग्वालटोली इलाके की VIP रोड पर एक दिल्ली नंबर वाली Lamborghini Revuelto (कीमत लगभग 10 करोड़ रुपये) हवा से बातें कर रही थी। अचानक, इस तेज रफ्तार कार ने अपना आपा खो दिया और सड़क पर चल रहे राहगीरों, एक ऑटो-रिक्शा और पार्क की गई मोटरसाइकिल को जोरदार टक्कर मार दी।

इस हादसे में 6 लोग घायल हुए, जिनमें तौफीक अहमद के पैर में गंभीर चोट आई है। वहीं, बाइक सवार विशाल और सोनू त्रिपाठी भी इसकी चपेट में आ गए। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार डिवाइडर पर चढ़ गई।

‘ड्राइवर’ वाली थ्योरी और CCTV का सच

आरोपी शिवम मिश्रा, जो कि मशहूर तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के बेटे हैं, उनके बचाव पक्ष ने एक अजीबोगरीब दावा पेश किया। उनका कहना था कि गाड़ी शिवम नहीं, बल्कि उनका ड्राइवर मोहन लाल चला रहा था और शिवम को मिर्गी (seizure) का दौरा पड़ा था।

हालांकि, Police Investigation और CCTV फुटेज कुछ और ही कहानी बयां करते हैं:

  • फुटेज में शिवम को ही ड्राइविंग सीट पर देखा गया।
  • हादसे के तुरंत बाद बॉडीगार्ड्स शिवम को कार से निकालते दिखे।
  • हैरानी की बात यह है कि बॉडीगार्ड्स कार की नंबर प्लेट हटाने की कोशिश करते भी नजर आए।

गिरफ्तारी, कोर्ट और फौरन जमानत

घटना के बाद पुलिस पर Media और सोशल मीडिया का भारी दबाव था। आखिरकार, 90 घंटे बाद यानी 11 फरवरी को पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल की स्पेशल टीम ने शिवम को एक प्राइवेट अस्पताल से गिरफ्तार किया।

लेकिन असली ट्विस्ट कोर्ट में आया। पुलिस ने शिवम की 14 दिन की कस्टडी मांगी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। नतीजा? शिवम मिश्रा को महज 20,000 रुपये के बॉन्ड पर उसी दिन जमानत मिल गई।

Timely Bharat का नजरिया यह मामला सिर्फ एक एक्सीडेंट का नहीं, बल्कि सिस्टम की खामियों का भी है। एफआईआर में देरी, अल्कोहल टेस्ट का न होना और इतनी जल्दी बेल मिल जाना—ये सब आम जनता के मन में सवाल पैदा करता है। क्या वाकई कानून सबके लिए बराबर है? फिलहाल पुलिस का कहना है कि जांच जारी है, लेकिन पब्लिक का गुस्सा सातवें आसमान पर है।

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Timely Bharat Desk

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