26 जनवरी 2026 का ऐतिहासिक सवेरा
Quick Highlights (एक नज़र में):
- तारीख: 26 जनवरी, 2026 (सोमवार)
- मुख्य अतिथि: एंटोनियो कोस्टा (EU Council President) और उर्सुला वॉन डेर लेयेन (EU Commission President)
- थीम: 150 Years of Vande Mataram & Aatmanirbhar Bharat
- मुख्य आकर्षण: बैटल एरे, महिला कोस्ट गार्ड दस्ता, ऑपरेशन सिंदूर, राफेल फ्लाईपास्ट।
- अगला पड़ाव: 29 जनवरी को ‘बीटिंग रिट्रीट’ (Beating Retreat) समारोह।
Republic Day 2026 Live Updates- आज भारत ने अपना 77वां गणतंत्र दिवस (77th Republic Day) एक नए जोश, नई उमंग और एक मजबूत वैश्विक संदेश के साथ मनाया। दिल्ली का कर्तव्य पथ (Kartavya Path) आज न सिर्फ भारत की सैन्य ताकत (Military Might) का गवाह बना, बल्कि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और कूटनीतिक जीत का भी प्रतीक बन गया। सुबह की पहली किरण के साथ ही देश ने अपनी आन-बान-शान का प्रदर्शन किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Droupadi Murmu) ने तिरंगा फहराया और 21 तोपों की सलामी (21-Gun Salute) के साथ राष्ट्रगान की गूंज ने हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया।
इस साल का गणतंत्र दिवस कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। जहां एक तरफ यूरोपीय संघ (European Union) के दो शीर्ष नेता—यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन (Ursula von der Leyen) और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा (António Costa)—बतौर मुख्य अतिथि (Chief Guests) मौजूद रहे, वहीं दूसरी तरफ परेड की थीम ‘150 Years of Vande Mataram’ ने अतीत के गौरव को वर्तमान की शक्ति से जोड़ दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) का केसरिया ‘बंधेज’ साफा और कर्तव्य पथ पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) की झांकी आज के सबसे बड़े टॉकिंग पॉइंट्स रहे।
Timely Bharat आपके लिए लाया है इस भव्य समारोह की एक-एक डिटेल, जो आज दिन भर कर्तव्य पथ पर घटी।
1. यूरोपियन पावर हाउस: चीफ गेस्ट्स का खास कनेक्शन (Republic Day 2026 Live Updates)
इस बार गणतंत्र दिवस पर विदेशी मेहमानों की उपस्थिति ने भारत की बढ़ती ग्लोबल धमक (Global Influence) को साबित किया। 2026 में भारत ने एक नहीं, बल्कि दो यूरोपीय दिग्गजों की मेजबानी की।
- एंटोनियो कोस्टा (António Costa): यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा का भारत आना एक ‘घर वापसी’ जैसा था। कोस्टा की जड़ें गोवा (Goa) से जुड़ी हैं, और उन्हें भारत का ‘ओवार्सीज फ्रेंड्स’ में गिना जाता है। परेड के दौरान जब उन्होंने राष्ट्रपति मुर्मू के साथ सलामी मंच साझा किया, तो यह भारत-पुर्तगाल और भारत-यूरोप के गहरे रिश्तों की तस्वीर थी।
- उर्सुला वॉन डेर लेयेन (Ursula von der Leyen): यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला की मौजूदगी ने साफ कर दिया कि दुनिया के नक्शे पर भारत अब एक ‘Strategic Partner’ है, सिर्फ एक बाजार नहीं। उनकी उपस्थिति ने भारत और यूरोप के बीच ट्रेड, डिफेंस और ग्रीन एनर्जी (Green Energy) के क्षेत्र में आने वाले बड़े समझौतों की ओर इशारा किया।
दोनों नेताओं ने परेड को बेहद गंभीरता और उत्साह के साथ देखा। विशेष रूप से जब ‘मेक इन इंडिया’ (Make in India) के तहत बने हथियार कर्तव्य पथ से गुजरे, तो इन वैश्विक नेताओं के चेहरों पर भारत की आत्मनिर्भरता के प्रति सम्मान साफ झलक रहा था।
2. थीम: 150 साल ‘वंदे मातरम’ के और आत्मनिर्भर भारत
इस वर्ष के गणतंत्र दिवस की आत्मा (Soul of the Event) थी इसकी थीम। सरकार ने इस बार दो प्रमुख विषयों को चुना:
- स्वतंत्रता का मंत्र: वंदे मातरम (150 Years of Vande Mataram)
- समृद्धि का मंत्र: आत्मनिर्भर भारत (Aatmanirbhar Bharat)
वंदे मातरम का 150वां साल: बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को 2026 में 150 साल पूरे हो गए हैं। परेड की शुरुआत और अंत में इस गीत की गूंज रही। संस्कृति मंत्रालय (Ministry of Culture) की झांकी इसी थीम पर आधारित थी, जिसमें 1870 के दशक से लेकर आज तक की भारत की यात्रा को दर्शाया गया। कर्तव्य पथ पर लगी विशेष पेंटिंग्स और सजावट में भी वंदे मातरम के छंदों (Verses) को उकेरा गया था, जो दर्शकों को आजादी की लड़ाई की याद दिला रहे थे।
आत्मनिर्भर भारत की झलक: दूसरी तरफ, ‘समृद्धि का मंत्र’ थीम ने भारत की आर्थिक और तकनीकी प्रगति को दिखाया। चाहे वह डिफेंस सेक्टर हो, स्पेस मिशन हो या फिर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर—हर झांकी में स्वदेशी (Indigenous) तकनीक का बोलबाला था।
3. मिलिट्री परेड (Military Parade ): ‘बैटल एरे’ और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का प्रदर्शन
गणतंत्र दिवस परेड का सबसे रोमांचक हिस्सा हमेशा हमारी सेना का शक्ति प्रदर्शन होता है। 2026 में भारतीय सेना (Indian Army) ने कुछ ऐसा किया जो पहले कभी नहीं देखा गया था।
Battle Array (बैटल एरे) फॉर्मेशन: इतिहास में पहली बार, भारतीय सेना ने परेड में ‘बैटल एरे’ फॉर्मेशन का प्रदर्शन किया। यह सिर्फ मार्चिंग नहीं थी, बल्कि एक युद्ध जैसी संरचना (Combat Formation) थी, जिसमें टैंक, इन्फैंट्री और हवाई सुरक्षा प्रणालियां एक साथ तालमेल में आगे बढ़ रही थीं। इसने दुश्मनों को कड़ा संदेश दिया कि भारत अब सिर्फ रक्षात्मक (Defensive) नहीं, बल्कि आक्रामक और संगठित युद्ध के लिए भी तैयार है।
Operation Sindoor (ऑपरेशन सिंदूर): तीनों सेनाओं (Tri-Services) की संयुक्त झांकी ‘ऑपरेशन सिंदूर: विक्ट्री थ्रू जॉइंटनेस’ (Victory Through Jointness) ने सबका ध्यान खींचा। यह झांकी भारत की एकीकृत सैन्य शक्ति (Integrated Theatre Commands) का प्रतीक थी। इसमें दिखाया गया कि कैसे आर्मी, नेवी और एयरफोर्स एक साथ मिलकर किसी भी मिशन को अंजाम दे सकते हैं।
हथियारों का जखीरा:
- T-90 भीष्म टैंक: अपग्रेडेड स्वदेशी तकनीक के साथ।
- नाग मिसाइल सिस्टम (NAG Missile System): एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल।
- धनुष गन सिस्टम: जिसे ‘देसी बोफोर्स’ भी कहा जाता है।
- BrahMos Missile: दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, जो भारत के गर्व का प्रतीक है।
4. नारी शक्ति: कोस्ट गार्ड की महिला टुकड़ी ने रचा इतिहास
2026 का गणतंत्र दिवस सही मायनों में ‘नारी शक्ति’ (Women Power) को समर्पित रहा। पिछले कुछ सालों से सेना में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है, लेकिन आज का नजारा अलग था।
- Indian Coast Guard (ICG): पहली बार, भारतीय तटरक्षक बल की पूरी मार्चिंग टुकड़ी (All-Women Contingent) महिलाओं द्वारा नेतृत्व की गई। असिस्टेंट कमांडेंट निशी शर्मा (Asst. Commandant Nishi Sharma) ने जब गर्व और आत्मविश्वास के साथ इस टुकड़ी का नेतृत्व किया, तो पूरा स्टैंड तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उनका मोटो ‘वयम रक्षाम:’ (We Protect) उनकी चाल में साफ झलक रहा था।
- Daredevils: CRPF की महिला बाइकर्स ने भी अपने साहसी स्टंट्स से सबको चौंका दिया। चलती बाइक पर योग करना हो या पिरामिड बनाना, भारत की बेटियों ने साबित कर दिया कि वे किसी से कम नहीं हैं।
ALSO READ 26 January Speech in Hindi: गणतंत्र दिवस पर दें ऐसा जोश भरा भाषण, हर तरफ गूंजेगा ‘जय हिंद’
Republic Day 2026: 85+ Best Wishes, Quotes & Messages for India’s 77th Celebration
5. पशु दस्ता: बैक्ट्रियन ऊंट और जांस्कर टट्टू
परेड में एक और अनोखा आकर्षण था—सेना का विशेष पशु दस्ता (Animal Contingent)। आमतौर पर हम घोड़ों और ऊंटों को देखते हैं, लेकिन इस बार कुछ दुर्लभ जानवरों ने भी कर्तव्य पथ पर मार्च किया।
- Bactrian Camels (दो कूबड़ वाले ऊंट): लद्दाख के ठंडे रेगिस्तान में सेना की मदद करने वाले ये ऊंट पहली बार राजपथ (अब कर्तव्य पथ) पर उतरे।
- Zanskar Ponies (जांस्कर टट्टू): सियाचिन जैसे दुर्गम इलाकों में रसद पहुंचाने वाले ये छोटे लेकिन मजबूत घोड़े भी परेड का हिस्सा बने।
- Black Kites (Raptors): सेना के प्रशिक्षित बाज (Falcons/Eagles) भी ‘हिम योद्धा’ (Him Yodha) दस्ते का हिस्सा थे, जो एंटी-ड्रोन मिशन में इस्तेमाल किए जाते हैं।
यह दस्ता ‘रिमाउंट एंड वेटनरी कॉर्प्स’ (RVC) द्वारा तैयार किया गया था और इसने दिखाया कि हाई-टेक वॉरफेयर के जमाने में भी प्रकृति और पशु हमारे जवानों के सबसे अच्छे साथी हैं।
6. फ्लाईपास्ट: आसमान में राफेल की गर्जना
परेड का ग्रैंड फिनाले हमेशा फ्लाईपास्ट (Flypast) होता है, और इस बार भी एयरफोर्स ने निराश नहीं किया।
- फॉर्मेशन: 100 से ज्यादा एयरक्राफ्ट्स ने हिस्सा लिया।
- राफेल और सुखोई: 2 राफेल, 2 सुखोई-30 MKI और 2 मिग-29 ने ‘वज्र’ फॉर्मेशन बनाया। राफेल की वर्टिकल चार्ली (Vertical Charlie) पैंतरेबाजी ने दर्शकों की सांसें रोक दीं।
- प्रचंड हेलिकॉप्टर: स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर ‘प्रचंड’ ने भी अपनी चपलता दिखाई।
- सिंदूर फॉर्मेशन: थीम के मुताबिक, फाइटर जेट्स ने आसमान में एक विशेष ‘सिंदूर’ फॉर्मेशन बनाया, जो भारत की सांस्कृतिक और सामरिक शक्ति का संगम था।
बादलों को चीरते हुए इन विमानों की आवाज ने पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसियों को भी भारत की वायु शक्ति का अहसास करा दिया।
7. सांस्कृतिक झांकियां: भारत की विविधता का रंग
सैन्य ताकत के बाद बारी आई भारत की सॉफ्ट पावर यानी संस्कृति की। कुल 30 झांकियां (Tableaux) कर्तव्य पथ पर निकलीं, जिनमें 17 राज्यों और 13 मंत्रालयों की थीं।
- उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh): यूपी की झांकी में ‘महाकुंभ 2026’ और ‘रामायण सर्किट’ की झलक दिखी। इसमें साधु-संतों की प्रतिकृतियां और गंगा आरती का दृश्य था।
- गुजरात (Gujarat): ‘ग्रीन एनर्जी’ थीम पर आधारित गुजरात की झांकी में कच्छ के रिन्यूएबल एनर्जी पार्क को दिखाया गया।
- लद्दाख (Ladakh): लद्दाख की झांकी में ‘कार्बन न्यूट्रल’ प्रदेश बनने की दिशा में उठाए गए कदमों और वहां की बौद्ध संस्कृति को दिखाया गया।
- सिनेमा की झांकी: पहली बार, भारतीय सिनेमा (Indian Cinema) को समर्पित एक झांकी भी परेड का हिस्सा बनी, जिसे मशहूर फिल्ममेकर संजय लीला भंसाली (Sanjay Leela Bhansali) ने क्यूरेट किया था। यह ‘100 Years of Talkies’ (बोलती फिल्मों के 100 साल) का जश्न मना रही थी।
8. पीएम मोदी और राष्ट्रपति मुर्मू: खास पल
- पीएम का साफा (Turban): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार बहुरंगी ‘बंधेज’ साफा पहना था, जिसकी लंबी पूंछ (Tail) हवा में लहरा रही थी। यह साफा राजस्थान और गुजरात की मिश्रित संस्कृति का प्रतीक लग रहा था। उन्होंने नेशनल वॉर मेमोरियल (National War Memorial) पर जाकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
- बग्गी की वापसी: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और मुख्य अतिथि एंटोनियो कोस्टा पारंपरिक बग्गी (Buggy) में बैठकर राष्ट्रपति भवन से कर्तव्य पथ तक आए। सुरक्षा कारणों से बीच में बग्गी बंद कर दी गई थी, लेकिन 2026 में इसका फिर से उपयोग परंपराओं को जीवित करने जैसा था।
9. सुरक्षा और तकनीक: AI की नज़र
2026 का गणतंत्र दिवस अब तक का सबसे ‘हाई-टेक’ इवेंट था। दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के लिए अभूतपूर्व इंतजाम किए थे।
- AI Smart Glasses: दिल्ली पुलिस के जवानों को एआई-लैस स्मार्ट ग्लास दिए गए थे, जो भीड़ में संदिग्ध चेहरों (Facial Recognition) को तुरंत पहचान सकते थे।
- CCTV Grid: पूरे लुटियंस ज़ोन को 1000 से ज्यादा हाई-डेफिनेशन कैमरों से कवर किया गया था।
- Traffic Management: लोगों को रियल-टाइम ट्रैफिक अपडेट देने के लिए विशेष ऐप्स का इस्तेमाल किया गया, जिससे आम जनता को कम से कम परेशानी हुई।
10. Padma Awards 2026: अनसंग हीरोज़ का सम्मान
परेड से एक शाम पहले, सरकार ने पद्म पुरस्कारों (Padma Awards) की घोषणा की। इस बार भी फोकस ‘पीपुल्स पद्म’ (People’s Padma) पर रहा। लिस्ट में बड़े सेलिब्रिटीज के बजाय उन जमीनी नायकों (Unsung Heroes) को तरजीह दी गई जिन्होंने समाज सेवा, पारंपरिक कृषि और कला के क्षेत्र में गुमनामी में रहकर काम किया।
- प्राकृतिक खेती करने वाले किसान: कई ऐसे किसानों को पद्म श्री दिया गया जो रसायनों के बिना खेती कर रहे हैं।
- दिव्यांग कलाकार: कला के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने वाले दिव्यांगजनों को सम्मानित किया गया।
- ISRO वैज्ञानिक: गगनयान और चंद्रयान मिशन से जुड़े वैज्ञानिकों को पद्म भूषण से नवाजा गया।
(नोट: विजेताओं की पूरी लिस्ट आप Timely Bharat की वेबसाइट पर अलग से देख सकते हैं।)
Conclusion: 2047 की ओर बढ़ता भारत
77वां गणतंत्र दिवस सिर्फ एक रस्म नहीं थी, बल्कि एक संकल्प था। ‘वंदे मातरम’ के 150 साल हमें हमारे संघर्षों की याद दिलाते हैं, तो ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘बैटल एरे’ जैसा सैन्य प्रदर्शन हमारे उज्ज्वल भविष्य की ओर इशारा करता है। यूरोपीय नेताओं की मौजूदगी ने यह मुहर लगा दी है कि 21वीं सदी में भारत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
जैसे ही आसमान में तिरंगे गुब्बारे छोड़े गए और ‘जन गण मन’ की अंतिम धुन बजी, कर्तव्य पथ पर मौजूद हर शख्स—चाहे वो वीवीआईपी हो या आम नागरिक—एक ही भावना से भरा था: मेरा भारत बदल रहा है, मेरा भारत आगे बढ़ रहा है।
जय हिंद! जय भारत!
(Disclaimer: यह लेख गणतंत्र दिवस 2026 के लाइव अपडेट्स और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। सभी तथ्य और कार्यक्रम भारत सरकार द्वारा जारी शेड्यूल के अनुसार प्रस्तुत किए गए हैं।)









