अगर आप पिछले 48 घंटों में कहीं ट्रैवल करने का प्लान बना रहे थे और आपकी फ्लाइट IndiGo की थी, तो यकीनन आप एक बुरे सपने से गुजरे होंगे। 5 दिसंबर 2025 की तारीख भारतीय एविएशन के इतिहास में एक ‘Black Day’ की तरह दर्ज हो गई है। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन, IndiGo—जो अपनी ‘On-Time Performance’ के लिए जानी जाती थी—अचानक घुटनों पर आ गई।
एक के बाद एक फ्लाइट्स कैंसिल होने लगीं और देखते ही देखते यह आंकड़ा 1,000 के पार पहुंच गया। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे बड़े एयरपोर्ट्स पर हजारों यात्री फंसे रह गए। किसी की जरूरी मीटिंग थी, तो किसी के घर शादी। यह सिर्फ ऑपरेशनल फेलियर नहीं, बल्कि एक ‘Nationwide Meltdown’ है।
आखिर ऐसा क्या हुआ कि आसमान पर राज करने वाली IndiGo जमीन पर आ गिरी? क्या यह सिर्फ कोहरे (Fog) का असर था या कहानी कुछ और है? आज के इस स्पेशल रिपोर्ट में हम करेंगे IndiGo Crisis का पूरा ‘DNA Test’ और आपको बताएंगे कि एक यात्री के तौर पर अब आपके पास क्या अधिकार बचे हैं।
1. महासंकट: आखिर हुआ क्या था 5 और 6 दिसंबर को?

दिसंबर का महीना यानी छुट्टियों और शादियों का पीक सीजन। 5 दिसंबर की सुबह जब यात्री एयरपोर्ट पहुंचे, तो उन्हें चेक-इन काउंटर पर ‘Boarding’ की जगह ‘Cancelled’ का बोर्ड नजर आया। IndiGo ने एक ही दिन में अपनी लगभग 20% फ्लाइट्स कैंसिल कर दीं।
यह सिलसिला 6 दिसंबर को भी जारी रहा। DGCA (Directorate General of Civil Aviation) के नए नियमों और क्रू की कमी ने एयरलाइन के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया। हालत यह थी कि एयरपोर्ट लॉबी में पैर रखने की जगह नहीं थी और सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर था।
किस शहर में कितना असर? (The Ground Reality) IndiGo का नेटवर्क इतना बड़ा है कि एक जगह दिक्कत आने पर पूरा सिस्टम हिल जाता है। 6 दिसंबर को प्रमुख शहरों का हाल कुछ ऐसा था:
- बेंगलुरु (BLR): 124 फ्लाइट्स कैंसिल (IT सिटी पूरी तरह जाम)।
- मुंबई (BOM): 109 फ्लाइट्स रद्द (बिजनेस ट्रैवलर्स सबसे ज्यादा प्रभावित)।
- दिल्ली (DEL): 86 फ्लाइट्स कैंसिल (कोहरे और कैंसिलेशन की दोहरी मार)।
- हैदराबाद (HYD): 66 फ्लाइट्स रद्द।
हजारों यात्री बिना खाने-पीने और रहने के इंतजाम के एयरपोर्ट पर रात गुजारने को मजबूर हुए। IndiGo का स्टाफ कई जगहों पर यात्रियों के सवालों का जवाब देने के लिए मौजूद ही नहीं था, जिससे अफरा-तफरी और बढ़ गई।
2. कैंसिलेशन की असली वजह: क्यों फेल हुआ IndiGo का सिस्टम?
यात्रियों का गुस्सा देखिए!
— Manish Tiwari (@livemanish_) December 5, 2025
Indigo की लापरवाही का खामियाज़ा जनता भुगत रही है…
और सरकार? बस तमाशा देख रही है।#IndigoDelay pic.twitter.com/ihrWbuGRU7
IndiGo ने शुरुआत में इसे “Unforeseen operational challenges” (अनपेक्षित परिचालन चुनौतियां) बताया, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह समस्या ‘Planning’ की कमी थी। आइए समझते हैं वो 4 मुख्य कारण जिनकी वजह से यह संकट आया:
A. नए FDTL नियम (Pilot Rest Regulations)
यह इस पूरे संकट की जड़ है। DGCA ने पायलटों की थकान कम करने और सेफ्टी बढ़ाने के लिए Flight Duty Time Limitations (FDTL) के नए नियम लागू किए हैं।
- नया नियम: अब एक पायलट एक हफ्ते में सिर्फ 2 ‘Night Landings’ ही कर सकता है। साथ ही, लगातार नाइट ड्यूटी पर भी रोक लगाई गई है।
- इम्पैक्ट: IndiGo का मॉडल ‘High Utilization’ पर आधारित है, यानी कम समय में ज्यादा उड़ानें। नए नियमों के चलते उनके पास रोस्टर में पर्याप्त पायलट ही नहीं बचे। एयरलाइन को इसके लिए एक साल का नोटिस मिला था, फिर भी ‘Crew Buffer’ तैयार नहीं किया गया।

B. A320 सॉफ्टवेयर ग्लिच (Technical Glitch)
मुसीबत कभी अकेले नहीं आती। वीकेंड पर IndiGo के A320 एयरक्राफ्ट के सिस्टम में एक सॉफ्टवेयर ग्लिच आ गया। इसके कारण कई फ्लाइट्स में देरी हुई और शेड्यूल बिगड़ गया। जब फ्लाइट्स आधी रात के बाद तक लेट हुईं, तो क्रू की ड्यूटी टाइमिंग खत्म (Time-out) हो गई और उन्हें फ्लाइट छोड़कर जाना पड़ा।
C. उत्तर भारत का कोहरा (Winter Fog)
दिसंबर की शुरुआत के साथ ही दिल्ली और उत्तर भारत में घना कोहरा छाने लगा है। कम विजिबिलिटी के कारण फ्लाइट्स लैंड नहीं हो पाईं, जिससे डोमिनो इफेक्ट (Domino Effect) शुरू हो गया। एक फ्लाइट लेट हुई, तो उसके कनेक्टिंग क्रू और एयरक्राफ्ट अगली 4 फ्लाइट्स के लिए लेट हो गए।
D. प्लानिंग की कमी (Management Failure)
क्रिटिक्स का कहना है कि IndiGo अपनी ‘Low Cost’ रणनीति के चलते हमेशा ‘Cut-to-cut’ स्टाफिंग पर काम करती है। जब डिमांड पीक पर थी (शादियां और छुट्टियां), तब उनके पास बैकअप प्लान नहीं था। यह मिसमैनेजमेंट अब यात्रियों पर भारी पड़ रहा है।
3. रिफंड का खेल: “100% वापसी” का वादा और यात्रियों का दर्द
It's all broken, but it's Modi, Modi, Modi.
— Shruti Dhore (@ShrutiDhore) December 6, 2025
According to the BJP, – If something good happens, it's Modi who did it.
– If something bad happens, what can Modi do about it?
These fools have enslaved themselves mentally.#INDvSA #IndigoDelaypic.twitter.com/8LwQT5kB9m
संकट के बीच सबसे बड़ा सवाल पैसे का है। IndiGo ने दावा किया कि 5 से 15 दिसंबर के बीच की बुकिंग्स पर कैंसिलेशन और रीशेड्यूलिंग चार्ज पूरी तरह माफ (Waived off) कर दिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि रिफंड ऑटोमैटिक प्रोसेस होगा और यात्रियों को रिफ्रेशमेंट दी जाएगी।
लेकिन, Ground Reality कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
यात्रियों की आप-बीती: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (Twitter) पर शिकायतों की बाढ़ आ गई है।
- एक यात्री ने शेयर किया कि उनकी टिकट का रिफंड मांगते वक्त IndiGo ने ₹8,718 की कटौती (Deduction) कर ली, जबकि वादा “Full Refund” का था।
- कई लोगों को रीशेड्यूलिंग के नाम पर अगले 3-4 दिन बाद की फ्लाइट्स दी जा रही हैं, जो उनके किसी काम की नहीं हैं।
- सबसे बुरी हालत उनकी है जिन्हें अर्जेंट जाना था। दूसरी एयरलाइंस की टिकटों के दाम ₹30,000 से लेकर ₹90,000 तक पहुंच गए हैं। यह आम आदमी की जेब पर सीधा डाका है।
होटल और खाने के वादे: IndiGo ने फंसे हुए यात्रियों को होटल देने का वादा किया था। लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि बेंगलुरु और मुंबई जैसे एयरपोर्ट्स पर यात्रियों को कहा गया कि वे खुद होटल का इंतजाम करें, बाद में बिल क्लेम करें। अब सवाल यह है कि जो मिडिल क्लास यात्री लिमिटेड बजट लेकर चल रहा है, वह महंगे शहर में तुरंत होटल का खर्चा कैसे उठाएगा?
4. सरकार का एक्शन: DGCA और मंत्रालय ने क्या किया?
जब मामला हाथ से निकलता दिखा, तो नागरिक उड्डयन मंत्रालय (Civil Aviation Ministry) को दखल देना पड़ा। यह सरकार के लिए भी चिंता का विषय है क्योंकि IndiGo के पास मार्केट का 60% से ज्यादा शेयर है।
सरकार के कड़े निर्देश:
- रिफंड डेडलाइन: मंत्रालय ने IndiGo को साफ आदेश दिया है कि सभी पेंडिंग रिफंड्स 7 दिसंबर, रात 8 बजे तक प्रोसेस कर दिए जाएं।
- कोई बहाना नहीं: रिफंड प्रोसेस करते समय कोई भी ‘Rescheduling Fee’ या एक्स्ट्रा चार्ज नहीं काटा जाएगा। ऐसा करने पर सख्त कार्रवाई होगी।
- FDTL में थोड़ी ढील: हालात सामान्य करने के लिए DGCA ने अस्थायी रूप से (Temporarily) FDTL नियमों में कुछ ढील दी है ताकि क्रू की कमी को मैनेज किया जा सके और बैकलॉग खत्म हो।
सरकार का यह कदम सराहनीय है, लेकिन नुकसान (Damage) पहले ही हो चुका है। हजारों लोगों के ट्रिप और इवेंट्स बर्बाद हो चुके हैं जिनकी भरपाई सिर्फ रिफंड से नहीं हो सकती।
5. अब कब सुधरेंगे हालात? (The Road Ahead)
IndiGo मैनेजमेंट का कहना है कि वे स्थिति को संभालने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं। उनका अनुमान है कि 10 से 15 दिसंबर तक ऑपरेशन्स पूरी तरह सामान्य (Normalize) हो जाएंगे।
हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक कोहरा रहेगा और बैकलॉग क्लियर नहीं होगा, छिटपुट कैंसिलेशन जारी रह सकते हैं। अगर आप अगले एक हफ्ते में ट्रेवल करने वाले हैं, तो आपको मानसिक रूप से तैयार रहना होगा।
6. काम की बात: अगर आपकी फ्लाइट भी है, तो क्या करें?
इस अफरातफरी के बीच घबराने के बजाय स्मार्ट तरीके से काम लेना जरूरी है। अगर आपकी IndiGo फ्लाइट अगले कुछ दिनों में है, तो नीचे दिए गए स्टेप्स फॉलो करें:
- 1. घर से निकलने से पहले चेक करें: एयरपोर्ट जाने से पहले IndiGo की वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर अपनी फ्लाइट का स्टेटस (Flight Status) जरूर चेक करें। कस्टमर केयर पर कॉल करने से बचें क्योंकि वेटिंग टाइम बहुत ज्यादा है।
- 2. रिफंड का सही तरीका: अगर फ्लाइट कैंसिल हुई है, तो एजेंट के भरोसे न रहें। सीधे IndiGo की वेबसाइट पर ‘Plan B’ विकल्प चुनें। नियमों के मुताबिक, कैंसिलेशन के केस में आपको 7 वर्किंग डेज के अंदर सोर्स अकाउंट (जिससे पेमेंट किया था) में पूरा पैसा वापस मिलना चाहिए।
- 3. वॉलेट नहीं, बैंक ट्रांसफर लें: अक्सर एयरलाइंस पैसा अपने ‘Credit Shell’ में डाल देती हैं। आप ‘Refund to Bank Account’ का विकल्प ही चुनें ताकि आप उस पैसे से दूसरी एयरलाइन या ट्रेन की टिकट बुक कर सकें।
- 4. एयरसेवा (AirSewa) पर शिकायत: अगर एयरलाइन आपकी बात नहीं सुन रही या रिफंड में मनमानी कटौती कर रही है, तो सरकार के AirSewa Portal या ऐप पर शिकायत दर्ज करें। यह सबसे प्रभावी तरीका है। आप 30 दिनों के बाद मामले को एस्केलेट भी कर सकते हैं।
- 5. रसीदें संभाल कर रखें: अगर आपको एयरपोर्ट पर खुद होटल या खाने का खर्च उठाना पड़ा है, तो उसकी पक्की रसीद (Invoice) जरूर रखें। बाद में रिम्बर्समेंट (Reimbursement) के लिए इसकी जरूरत पड़ेगी।
निष्कर्ष (Conclusion)
IndiGo का यह संकट भारतीय एविएशन इंडस्ट्री के लिए एक ‘Wake-up Call’ है। यह साबित करता है कि चाहे कोई कंपनी कितनी भी बड़ी क्यों न हो, अगर वह नियमों और कर्मचारियों के वेलफेयर (Welfare) के साथ बैलेंस नहीं बनाएगी, तो सिस्टम कभी भी क्रैश हो सकता है।
यात्रियों के लिए यह समय बेहद तनावपूर्ण है। उम्मीद है कि 7 दिसंबर की डेडलाइन के बाद रिफंड की समस्या सुलझ जाएगी और आसमान का सफर एक बार फिर सुहाना होगा। लेकिन फिलहाल के लिए, सलाह यही है—“Check before you leave” (निकलने से पहले जांच लें)।
Timely Bharat की सलाह: क्या आपकी फ्लाइट भी कैंसिल हुई? क्या आपको रिफंड मिला? अपने अनुभव हमारे कमेंट बॉक्स में जरूर शेयर करें। सही जानकारी ही आपको और दूसरों को इस परेशानी से बचा सकती है।
(Disclaimer: यह आर्टिकल 6 दिसंबर 2025 तक उपलब्ध जानकारी और आंकड़ों पर आधारित है। फ्लाइट स्टेटस और रिफंड पॉलिसी के लिए हमेशा एयरलाइन की आधिकारिक वेबसाइट चेक करें।)
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