Bioscan research startup : ब्रेन इन्ज़्यूरी आज भी दुनिया की सबसे गंभीर समस्याओं में से एक है। सड़क हादसे, गिरने या खेल में लगी सिर की चोट अक्सर इतनी जल्दी पकड़ में नहीं आती, इसका सही डायग्नोसिस करने के लिए CT स्कैन या MRI जैसी महंगी टेक्नोलॉजी का सहारा लेना पड़ता है।
आमतौर पर इसके सिंप्टम्स भी इतनी देरी से पता चलते हैं कि यदि इलाज देर से शुरू हुआ तो मरीजों को भारी नुकसान भी झेलना पड़ता है। इसी चुनौती को हल करने के लिए मुंबई की एक Health Tech Startup: Bioscan Research Startup ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है जो बिना किसी सर्जरी के ब्रेन इन्ज़्यूरी की इनिशियल स्टेज में ही पहचान कर सकती है।
फिलहाल यह इन्वेंशन एक प्रोटोटाइप के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है लेकिन अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर सफल होती है तो इमरजेंसी मेडिकल केयर, एंबुलेंस सेवा यहां तक की ग्रामीण क्षेत्रों में भी बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
क्या है Bioscan Research Startup
Bioscan Research Startup मुंबई बेस्ड एक मेडिकल टेक्नोलॉजी स्टार्टअप है। इसका फोकस एक ऐसा डायग्नोस्टिक डिवाइस तैयार करना है जो गंभीर से गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का पता कर सके ताकि समय पर इलाज मिल पाए।
यह स्टार्टअप एक ऐसी पोर्टेबल मेडिकल टेक्नोलॉजी तैयार कर रहा है जिसे एंबुलेंस, स्पोर्ट्स ग्राउंड, सेना क्षेत्र और दूर दराज के इलाकों में इस्तेमाल किया जाएगा। यह मशीन बिना MRI और बिना CT स्कैन के ब्रेन में चलने वाली अवांछित गतिविधि के बारे में पता लागयेगी ताकि समय पर सही इलाज शुरू हो सके।
इस टेक्नोलॉजी की सबसे बड़ी खासियत क्या है ?
Bioscan Research Startup की यह टेक्नोलॉजी पूरी तरह से नॉन इनवेसिव डायग्नोस्टिक टेक्नोलॉजी पर तैयार की जा रही है। इसका मतलब है कि यहां मरीज के शरीर में किसी प्रकार का कोई उपकरण डालने की जरूरत नहीं होगी और ना ही कोई सर्जरी करने की जरूरत होगी।
बाहरी सेंसर और एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की मदद से ब्रेन में होने वाले बदलाव को सावधानी से देखा जाएगा, इसका एनालिसिस किया जाएगा और शुरुआती स्तर पर ही यह समझने की कोशिश की जाएगी की क्या मरीज को ब्रेन में कोई इन्ज़्यूरी हुई है या नहीं? इसी के बाद आगे का इलाज शुरू किया जाएगा।
सही समय पर ब्रेन इन्ज़्यूरी की पहचा जरूरी क्यों है?
आमतौर पर ब्रेन इन्ज़्यूरी के मामलों में शुरुआती घंटे ही गोल्डन पीरियड माने जाते हैं। इस दौरान एक लंबा समय CT स्कैन/ MRI के दौरान निकल जाता है। इसके बाद इसकी रिपोर्ट आएगी रेडियोलॉजिस्ट इस स्टडी करेगा जिसमें लंबा समय बीत जाता है। ऐसे में यदि सही टेक्नोलॉजी आ गई जहां ब्रेन डेमेज का पता शुरुआती चरणों में ही लगाया जाएगा इससे न्यूरोलॉजिकल नुकसान कम होगा, इलाज की गारंटी और ज्यादा बढ़ जाएगी, मरीज के ICU में भर्ती होने की संभावना कम होगी, जितना जल्दी इलाज होगा रिकवरी उतनी तेज होगी।
Bioscan Research Startup कि यह तकनीक कैसे काम करती है?
Bioscan Research Startup की तकनीक को लेकर अभी तक कोई भी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। हालांकि जितनी जानकारी मेडिकल क्षेत्र में उपलब्ध है उससे स्पष्ट होता है कि यह एक ऐसा सिस्टम बनाने की कोशिश कर रहे हैं जो शरीर को नुकसान पहुंचाए बिना ब्रेन का एनालिसिस करेगी। इसमें एडवांस सेंसर, बायो सिग्नल एनालिसिस, रियल टाइम डाटा प्रोसेसिंग, AI बेस्ड सिग्नल इंटरप्रिटेशन, पोर्टेबल डायग्नोस्टिक डिवाइस इत्यादि की मदद ली जा सकेगी।
इन्वेंशन का सबसे ज्यादा फायदा कैसे होगा
- यदि यह इन्वेंशन सफलतापूर्वक हो जाता है तो Bioscan Research Startup द्वारा विकसित किया गया यह उपकरण सड़क दुर्घटना के मरीजों की मदद करेगा।
- एक्सीडेंट के तुरंत बाद ब्रेन इन्ज़्यूरी का अंदाजा लगाने में आसानी होगी।
- स्पोर्ट्स इन्ज़्यूरी जैसे कि क्रिकेट, फुटबॉल ,बॉक्सिंग के दौरान सिर पर लगी चोटों में भी तुरंत जांच संभव होगी।
- साथ ही आर्मी क्षेत्र में यह पोर्टेबल डिवाइस काफी उपयोगी होगा जिससे सेना को भारी नुकसान से बचाया जा सकेगा।
- ग्रामीण क्षेत्रों में जहां CT स्कैन/ MRI की सुविधा नहीं है वहां भी शुरुआती जांच काफी आसानी से होगी।
- भविष्य में इसे एंबुलेंस में भी इंस्टॉल किया जाएगा ताकि मरीज के अस्पताल पहुंचने से पहले ही सारी प्राथमिक जांच एंबुलेंस में हो जाए।
यह इनोवेशन HealthTech Sector के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
- Bioscan Research Startup का यह इनोवेशन आज हेल्थ टैक सेक्टर की उम्मीद बढ़ा रहा है, क्योंकि इस प्रकार के पोर्टेबल डायग्नोस्टिक डिवाइस के जरिए न केवल भारतीय हेल्थ इंडस्ट्री में ही नही बल्कि वैश्विक लेवल पर भी यह उपकरण काम आएगा।
- Bioscan Research आज लेटेस्ट जेनरेशन, MedTech स्टार्टअप में शामिल हो चुका है, जिसने महंगी मेडिकल जांच को सस्ता बनाने का काम किया है।
- इसीलिए उनके इस इनोवेशन से भी बहुत ज्यादा उम्मीदें लगाई जा रही है।
इस स्टार्टअप के सामने कौन सी चुनौतियां हैं?
Bioscan Research Startup के सामने फिलहाल कई सारी चुनौतियां खड़ी हैं, जैसे कि क्लीनिकल वैलिडेशन, रेगुलेटरी अप्रूवल, डॉक्टर का भरोसा, बड़े अस्पतालों में अपनाए जाने की गारंटी, लार्ज स्केल पर इस प्रोडक्ट का उत्पादन और इसे इकोनॉमिकल लेवल पर किफायती बनाए रखना।
Bioscan Research Startup आने वाले समय में मेडिकल स्टार्टअप सेक्टर में एक गेम चेंजर साबित हो सकता है। जहां बिना सर्जरी के ब्रेन इंजरी डिटेक्शन आसानी से किए जाएंगे। हालांकि उनकी चुनौतियां भी कुछ कम नहीं हैं। लेकिन मेडिकल इनोवेशन में यदि यह उपकरण सफलतापूर्वक लॉन्च हो जाता है। तो इससे न केवल भारत को बल्कि पूरे विश्व को मदद मिलेगी।













