आज का युग पूरी तरह से Gen Z का युग है। परंतु त्रासदी देखिए कि Gen Z का भारतीय संस्थाओं से भरोसा उठ रहा है। भारत दुनिया का एक ऐसा देश है जहां वर्तमान में 65% आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है। यह आबादी इंटरनेट सोशल मीडिया और डिजिटल दुनिया में पली बड़ी है। इसका सीधा अर्थ है कि भारत में फिलहाल 65% Gen Z रह रहे हैं।
यह एक ऐसी यूथ है जो रटा रटाया ज्ञान नहीं मानती। यह सवाल पूछते हैं, तर्क मांगते हैं और शायद यही वजह है कि अब Gen Z को भारतीय संस्थानों पर बिल्कुल भरोसा नहीं रहा।
दिन-ब-दिन बिगड़ी हुई न्याय व्यवस्था, शिक्षा प्रणाली, भर्ती परीक्षा, कॉर्पोरेट संस्थानों में होने वाले घोटाले इन सब से Gen Z परेशान हो चुकी है और अब ऐसा लगने लगा है की Gen Z और युवाओं को सिस्टम पर बिल्कुल भरोसा नहीं रहा। अब सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? क्या यह केवल सोशल मीडिया का असर है या सच में भारतीय संस्थानों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए हैं?
कौन है Gen Z और क्या है इसकी खासियत?

- Gen Z वह पीढ़ी है जिसने बचपन से ही इंटरनेट, स्मार्टफोन, सोशल मीडिया को देखा है।
- इस पीढ़ी की खासियत यह है कि यह आंखें बंद कर किसी भी बात पर भरोसा नहीं करती।
- हर जानकारी को क्रॉस चेक करती है।
- ट्रांसपेरेंसी की मांग करती है।
- अपने अधिकारों के प्रति यह सजग है।
- यह किसी भी इंस्टिट्यूट पर चुपचाप भरोसा नहीं करती बल्कि इन्हें फैक्ट और तथ्य चाहिए।
Gen Z पूरी तरह से उम्मीद करती है कि सरकार और बड़े अधिकारी जवाबदेही लेंगे। इन सारे कामों में अगर Gen Z को कहीं भी संतुष्टि नहीं मिलती तो वह तुरंत सवाल उठाती है। यही वजह है कि पिछले कुछ समय से सरकार बड़े प्रशासनिक अधिकारी भारत की न्याय व्यवस्था शिक्षा व्यवस्था यहां तक की भर्ती व्यवस्थाएं जवाबदेही नहीं ले पा रही दिन-ब-दिन घोटाले बढ़ते जा रहे हैं।
आखिर क्या वजह है जो Gen Z का भारतीय संस्थाओं से भरोसा उठ रहा है?
भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी : भारतीय युवाओं के लिए सबसे बड़ा सपना होता है सरकारी नौकरी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में भर्ती परीक्षाओं पर लगातार सवाल उठे हैं।
- NEET परीक्षा विवाद
- UGC-NET परीक्षा टलना
- कई राज्यों में पेपर लीक होना
- राज्यों में शिक्षकों की भर्ती और पुलिस भर्ती में लगातार देरी होना
वे सभी छात्र जो पिछले दो-तीन साल से तैयारी कर रहे हैं, कोचिंग पर खर्च कर रहे हैं उन्हें यदि पता चलता है कि पेपर लीक हो चुका है तो ऐसी घटनाएं परीक्षा का सिस्टम ही नही बिगाड़ती बल्कि पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता खत्म कर देती है। यही वजह है कि Gen Z का भारतीय संस्थाओं से भरोसा उठ रहा है।
सोशल मीडिया का प्रचलन : जब से सोशल मीडिया अस्तित्व में आया है हर संस्था सवालों के घेरे में आ चुकी है। पहले कोई एक घटना ही सामने आती थी परंतु अब अन्याय की हर कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हो जाती है। CCTV फुटेज, मोबाइल वीडियो, RTI के दस्तावेज, लाइव स्ट्रीमिंग, फैक्ट चेक कुछ ही मिनट में इंटरनेट पर अपलोड हो जाते हैं और चुटकियों में वायरल हो जाते हैं। और Gen Z हर खबर पर नजर रखती है। ये भी एक मुख्य कारण है कि Gen Z का भारतीय संस्थाओं से भरोसा उठ रहा है।
मेनस्ट्रीम मीडिया का पक्षपात: लोकतंत्र का चौथा और सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ होता है मीडिया, लेकिन पिछले कुछ समय से मीडिया सनसनीखेज खबरों पर ही ध्यान दे रहा है। बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्थानीय समस्याएं यह सब कुछ समाचार से लुप्त हो चुके हैं। प्रतिष्ठित पत्रकार और बड़ी-बड़ी मीडिया एजेंसियां आजकल केवल पॉलिटिकल बहस और ब्रेकिंग न्यूज़ पर ही ध्यान दे रही है जिसकी वजह से युवाओं का इन पर भरोसा उठ गया है।
वेंटिलेटर पर न्याय व्यवस्था : किसी भी देश के लिए उसकी न्याय व्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण होती है और नागरिकों को न्याय व्यवस्था से न्याय मिलने की उम्मीद रहती है। लेकिन पिछले कुछ समय से न्याय व्यवस्था भी वेंटिलेटर पर पहुंच चुकी है। लंबे समय तक फैसले नहीं आ रहे, बलात्कारी खुलेआम घूम रहे हैं, क्राइम रेट बढ़ता जा रहा है, लोगों में अब सजा का डर नहीं बचा, ऐसे में Gen Z का विश्वास अब न्यायपालिका से भी उठने लगा है।
राजनीति से बढ़ती दूरी : Gen Z का भारतीय संस्थाओं से भरोसा उठ रहा है इसका मुख्य कारण भारत की खराब राजनीतिक व्यवस्था भी है। एक समय था जब Gen Z राजनीतिक दल के समर्थक होते थे। परंतु अब Gen Z बढ़ती हुई बेरोजगारी, खराब शिक्षा व्यवस्था, बढ़ती हुई महंगाई इत्यादि से त्रस्त हो चुके हैं और अब वे राजनीतिक पार्टी हो पर भरोसा करने के लिए तैयार नहीं।
बिगड़ी हुई शिक्षा व्यवस्था और डिग्री की घटती कीमत : आज भारत की शिक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में आ चुकी है। लाखों युवा डिग्री लेकर नौकरी की तलाश कर रहे हैं। विदेशों में भी अब धीरे-धीरे दरवाजे बंद होते जा रहे हैं। ऐसे में अब Gen Z उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार जरूरत के अनुसार उद्योगों में बदलाव करेगी। लेकिन सरकार तो यहां राजनीति खेलने में ही उलझी हुई है। इसीलिए Gen Z को अब भारतीय शिक्षा व्यवस्था पर भरोसा नहीं रहा।
इस भरोसे को कैसे मजबूत किया जाए?
Gen Z का भारतीय संस्थाओं से भरोसा उठ रहा है ऐसे में अगर Gen Z का भरोसा फिर से प्राप्त करना है तो भर्ती परीक्षाओं में तकनीकी सुरक्षा बढ़ानी होगी।
- भ्रष्टाचार को समाप्त करना होगा।
- न्याय प्रणाली को बेहतर करना होगा।
- सरकारी निर्णय ट्रांसपेरेंट करने होंगे।
- शिक्षा और रोजगार पर काम करना होगा।
- मेनस्ट्रीम मीडिया को जवाबदेही लेनी होगी और जिम्मेदारी से रिपोर्टिंग करनी होगी।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फेक न्यूज़ पर लगाम लगानी होगी।
हालांकि यह सत्य जरूर है कि Gen Z का भारतीय संस्थाओं से भरोसा उठ रहा है, लेकिन Gen Z विद्रोही नहीं है, वह जवाबदेही चाहती है, तर्कों के साथ फैक्ट जाती है, ऐसे में यदि भारत सरकार चाहती है की अर्थव्यवस्था बेहतर हो और भारत एक विकसित देश का दर्जा पाए तो युवा नागरिकों की बात माननी होगी। युवाओं के सवालों के जवाब देने होंगे और जरूरी बदलाव भी करने होंगे।
ALSO READ Political PR : नेताओं की छवि सच से बनती है या PR से?? जानिए PR कैसे बदल देता है जनता की राय?








